1-फ़रमाईश
मिहिर को अभी पता चला कि जिस सरकारी नौकरी के लिए साक्षात्कार दिया था उसमे उसका चयन हो गया है ! इस खबर से घर भर में ख़ुशी की लहर और रिश्तेदार,पड़ौसियों की बधाइयों का तांता लग गया ! माता पिता तो ख़ुशी से फूले नहीं समां रहे थे ,अस्सी वर्षीया दादी उसकी बलैयां लेते नहीं थक रही थीं ! मिलने वालों का मुँह मीठा करने को आई विभिन्न मिठाइयों की खुशबु से घर गमक रहा था !
कब रात हुई,किसी को होश नहीं था ! महाराज ने जब आकर मेज़ पर भोजन लगने की सूचना दी तब सब शांत होकर भोजन को बैठे ! दादी-पोते में हंसी मज़ाक चल रहा था,दादी ने पोते को मिठाई खिलाई और पोता दादी के मिठाई खिला रहा था कि ख़ुशी से दादी ने फ़रमाईश की,"मिहिर बेटे सिर्फ मिठाई से काम नहीं चलेगा तेरी पहली तनख्वाह से मैं बहुत बढ़िया सी साड़ी लूंगी !"
पोता कुछ कहता तब तक उसकी माँ बोल पड़ी, "बढ़िया साड़ी ? अब आपको जीना ही कितना है ?"
मुँह की मिठाई का स्वाद अचानक कसैला हो गया था दादी का,पर मिहिर दादी का मुख हाथ में लेकर बोल उठा,"अरे माँ,क्यों कंजूसी कर रही हो,देखना दादी मेरी शादी के बाद पड़पोते से स्वर्ग की सीढ़ी चढ़ कर दादा के पास जाएंगी, हैं ना दादी ?"
बूढी झुर्रियों भरे चेहरे,पोपले मुख से हंसी फूट कर पोते को दुआएं दे रही थीं !
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