-दर्द--
कीमो का असहनीय दर्द जिसमे पूरे बदन में झुनझुनाहट हो जाती थी,उल्टियों के मारे अधमरा हो जाता उपेन्द्र ना अपने हाथ से खाना खा पाता था,ना कमीज़ के बटन बंद कर पाता था पर सह रहा था सिर्फ अपनी पत्नी और इकलौती बेटी की खातिर जिसने बड़ी मेहनत के बाद मेडिकल में दाखिला लिया, उसी दिन उसे अपनी बीमारी का पता चला था !
कितना खुश था एक साथ कई खुशियाँ पाकर जब खेत से मिले पैसों से महानगर में अपना खुद का मकान आवंटित कराया था,बरसों की बीवी की एक अदद कार लेने की ख्वाहिश उसकी पसंद की कार दिला उसके चेहरे की ख़ुशी बढाई थी !बेटी ने अपने दम पर सरकारी मेडिकल कॉलेज में दाखिले में सफलता पायी थी ! चहुँ ओर से बधाई के फोन,व्हाट्सएप और मिलने वालों को मिठाई खिलाते उसके पाँव ज़मीन पर नहीं पड़ रहे थे !
पत्नी और बेटी संग बैठ नए घर को सजाने के सपने देखने शुरू किये थे,क्यूँ कि अब बेटी के लिए ना प्राइवेट कॉलेज में डोनेशन देना था और ना फीस की चिंता करनी थी !उसके भविष्य के लिए आश्वस्त हो चुका था,बेटी के लिए खरीदारी चल रही थी और बाज़ार में ही उसे वमन हुआ था,जिसका रंग कुछ लालिमा लिए और भयंकर बदबूदार था !तीनों डर गये थे किसी आशंका से और खरीदारी छोड़ सीधे डॉक्टर के पास पहुंचे,वहां एंडोस्कोपी देखते ही डॉक्टर ने उसे दिल्ली जाने की और केंसर के इलाज़ की सहाल दी थी !
वो कहते हैं ना जरुरत से ज्यादा ख़ुशी तो किस्मत को भी बर्दाश्त नहीं होती और ग्रहण लग ही जाता है !
" PET" की रिपोर्ट आती होगी,तब तक तुम थोडा सा जूस पी लो ना,सुबह से कुछ नहीं लिया,कमजोरी आएगी " पत्नी ने मरियल सी,आवाज़ में डरते हुए कहा तो उसकी बेचैनी और बढ़ गयी !
"नहीं,थोड़ी देर और इंतज़ार करो,डॉक्टर साहेब आभी आते ही होंगे,शायद रिपोर्ट में गांठें कम आयें फिर दोनों जूस पियेंगे "कहने को वो कह गया,पर आवाज़ काँप रही थी,मन ही मन अपने ईश्वर को मना रहा था !
पर तभी पत्नी के चेहरे पर गौर किया,वहां मातम की सूचना से पहले ही "वैधव्य "की काली परछाईं गहरा गयी थी !पत्नी के हाथ में रिपोर्ट के कागज़ फरफरा रहे थे,आँखों में निराशा जता गयी कि कुछ भी सही नहीं है,उसे लगा कि पत्नी के दुःख के आगे उसका दर्द,? पत्नी ने कबसे कागज़ छुपाये थे कि वो कुछ खा ले तब बताये...जूस का गिलास उसने लपक कर लिया और गटागट पी गया,जैसे पत्नी अपना दर्द पी रही थी !